खामोश बैठे - बैठे ही पलकें भीग जाती हैं
न जाने किसकी याद है जो आंसू बनकर आती है
सायद कोई अपना है जो मुझसे दूर लेकिन दिल के पास है
इसीलिए बिना वजह मेरी रातों की नींद उड़ जाती नहै
मुझसे दूर रहकर भी कभी उदास न होना
दिल की तड़प अगर सहन न हो तो भी धीरज न खोना
मिलना बिछड़ना तो हाथों की लकीरों का खेल है
इसी बात को याद करके खुद को समझा लेना
चलते - चलते जिन्दगी का सफर कट जायेगा
विश्वास रखो राहों का हर कांटा हट जायेगा
जितनी तमन्ना हमने की तुम्हारी किसी ने न की होगी
सायद ये जुदाई किस्मत लिखने वाले की ही कमी रही होगी
चलो कहीं दूर चलें जहां कोई भी न हो
एक प्यार का मंदिर जिसमे मूर्तियाँ हम दोनों की हो
कभी मै पुजारी बनूँ कभी तुम पुजारन बनो
बस इक दूजे के लिये हो स्रद्धा, दिलों मे दुनियादारी न होहो
मन मे, दिल मे और इन आँखों मे तुम्हे बसाना है
खुद जी भरके रोकर बस तुम्हें हँसाना है
कुछ इस तरह अब जिन्दगी का सफर बिताना है कि
कांटा तुम्हे चुभे और उसका दर्द खुद को लगाना हैहै
तेरे प्यार की कीमत कुछ इस तरह दिया करेंगे
तुम पर आई बला को खुद पर लिया करेंगे
तुम से ही तो जीने की वजह मिली है हमे
तुमसे बिछड़कर मरने की दुआ किया करेंगे

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