कुछ तो था


कुछ तो था


कहीं दूर से मुझे कोई बुलाता हो जैसे,
खुद आँसू बहाकर मुझे रूलाता हो जैसे।।
भूल कर भी उसे भुला नहीं पाता हूँ मै,
समझ नहीं आता, उसे भुलाऊँ तो भुलाऊँ कैसे।।

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